दिन चढ़ते ही भाग रहा हूँ
दिन ढलने तक भाग रहा हूँ
क्या खुद की तलाश है
या खुद से ही भाग रहा हूँ...
दिन ढलने तक भाग रहा हूँ
क्या खुद की तलाश है
या खुद से ही भाग रहा हूँ...
कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है..... बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन..... देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...