Thursday, November 13, 2014

खुदा या शैतान


एक दिन हुआ गुमाँ क़ि हम खुदा हो गये
जो चाहा वो मिला, जो सोचा वो हुआ
पीतल से सोना बना जिसे भी हमने छुआ
अपनी हस्ती एहसान; औरों के वजूद, गुनाह हो गये.

दूसरों का मुक़द्दर लिखने का जुनून छाने लगा,
झुके हुए सर देख कर, मज़ा सा आने लगा,
इंसानियत के आखरी एहसास भी हवा हो गये
एक दिन हुआ गुमाँ क़ि हम खुदा हो गये.

इसी नशे में चूर, अपनी धुन में हम सवार थे,
एक बच्चा ग़लती से सामने आया कार के,
गालियाँ देते हुए, एक थप्पड़ उसे जड़ दिया,
जानता नही मैं कौन हूँ, चुभो ये नश्तर दिया.

सहमा सा वो बच्चा, सुबक कर कहने लगा,
अभी खुदा से मिला था, जिसने मुझे खाना दिया,
आपने गिरा दिया, तो आप शैतान हो गये.
एक दिन हुआ गुमाँ क़ि हम खुदा हो गये.

Friday, November 7, 2014

जंग


दिलो दिमाग़ में बेतरहा जंग ज़ारी है,
आज एक ने दाव जीता,
कल शायद दूजे की बारी है....

किस की मानूं, किसे ठुकराऊ,
दोनो ही तो अपने हैं....
इसी उलझन में बीती जाती उम्र ये सारी है.

Sunday, November 2, 2014

सपने


आओ कुछ सपने बोते हैं...

जैसा जग हम सोचते हैं
जैसा जग हम चाहते हैं
वो सच से बहुत दूर है
और राह कठिन ज़रूर है

उस राह पर कभी,
साथी भी अपने खोते हैं.
आओ कुछ सपने बोते हैं...

सच और सपने के बीच का
समय है भैया बड़ा निराला
उसे परीक्षा कहते हैं
बड़ा कड़वा उसका निवाला

परीक्षा के डर से कभी,
क्या हौसले रोते हैं.
आओ कुछ सपने बोते हैं...

परीक्षा है हर श्वास की
हर आम की, हर ख़ास की
हताशा की, उल्लास की
उस अडिग विश्वास की

विश्वास हो गर खुद पर,
सपने भी सच होते हैं.
आओ कुछ सपने बोते हैं...

ढंग निराले दुनिया के


बराबरी एक मिथ्या है
और न्याय मृगतृष्णा है

ये दुनिया का जो मेला है
सब अभिमानों का खेला है

जब तक दो इंसान हैं
तब तक दो अभिमान हैं

मैं पुरुष हूँ, मुझको क्या डर है
मैं स्त्री हूँ, ये मेरा घर है

मेरा धर्म है सबसे महान
बाकी सब अनपढ़ नादान

मैं गोरा हूँ, सबसे ऊपर
ज़रा आना तुम सामने झुककर

मेरे पास है पैसा पैसा
तेरा वजूद है क्या और कैसा

तुम जो बराबरी माँगते हो
इंसानियत की रट हांकते हो

तुमसे पूछूँ, तुम बतलाओ
अपना न्याय हमें दिखाओ

क्या दोनो हाथ बराबर हैं
या एक ज़्यादा प्यारा है
क्या दोनो आँख बराबर हैं
या एक का खोना गवारा है

दुनिया का यही उसूल है
जो ताक़तवर वही क़ुबूल है..

ये होता तो क्या होता, वो होता तो क्या होता


वक़्त बदला, दिन रात बदले
चेहरे बदले और हाथ बदले..

रिश्ते बदले, जज़्बात बदले
इंसान बदला, हालात बदले..

साँस लेने की तो फ़ुर्सत नहीं
बीते पलों की याद को,
कौन अपनी याददाश्त बदले..

बहुत कुछ करने की क़सक
आज भी जवां है दिल में ,
गर अपनी भी औकात बदले....