मैं दुनिया घूमना चाहता हूँ पर..
मैं बेपरवाह झूमना चाहता हूँ पर..
मैं सपने पीना चाहता हूँ पर..
मैं खुल के जीना चाहता हूँ पर..
मैं दुख हरना चाहता हूँ पर..
मैं खुशियाँ भरना चाहता हूँ पर..
मैं इंसान बनाना चाहता हूँ पर..
मैं अमन लाना चाहता हूँ पर..
एक छोटा सा है ये पर,
बन गया है कितना ताक़तवर !!!
ये पर, क्यूँ मेरी राह में है रोड़े अटकाता,
ये पर, पर लगा कर उड़ क्यूँ नहीं जाता...
कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है..... बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन..... देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...
Thursday, March 12, 2015
Saturday, February 7, 2015
ज़िंदगी - लंबी या बड़ी?
जितना जी लिया, उससे शायद कम बाकी है,
कितनी खुशियाँ अभी बाकी हैं,
ना जाने कितने गम बाकी हैं...
तुझे बेपनाह जीता रहूँगा, ये इरादा है ज़िंदगी,
आखरी साँस बाकी है जब तक,
जब तक आखरी दम बाकी है !!!
कितनी खुशियाँ अभी बाकी हैं,
ना जाने कितने गम बाकी हैं...
तुझे बेपनाह जीता रहूँगा, ये इरादा है ज़िंदगी,
आखरी साँस बाकी है जब तक,
जब तक आखरी दम बाकी है !!!
Tuesday, February 3, 2015
रिश्ते....
कभी तो दुनिया चलाते हैं ये रिश्ते
और कभी दुनिया जलाते हैं ये रिश्ते.
सात समंदर की दूरी भी समेट लेते हैं ये कभी,
और कभी जली रोटी पर क़ुर्बान हो जाते हैं ये रिश्ते.
जान दे कर भी निभाए जाते हैं ये कभी ,
और काग़ज़ के टुकड़ों के लिए टूट जाते हैं ये रिश्ते.
कोई यूँ तन्हा कि रिश्ते नहीं हैं निभाने को
कोई रिश्तों की भीड़ में हो कर भी है तन्हा....
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