कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है.....
बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन.....
देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...
Saturday, February 7, 2015
ज़िंदगी - लंबी या बड़ी?
जितना जी लिया, उससे शायद कम बाकी है,
कितनी खुशियाँ अभी बाकी हैं,
ना जाने कितने गम बाकी हैं...
तुझे बेपनाह जीता रहूँगा, ये इरादा है ज़िंदगी,
आखरी साँस बाकी है जब तक,
जब तक आखरी दम बाकी है !!!
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