और आदमी आगे निकल जाता है.
और कभी पलक झपकने से पहले,
मंज़र बदल जाता है.
गर वक़्त और ज़िंदगी साथ साथ चल देते,
तो ए खुदा इसमें तेरा क्या बिगड़ जाता है...
कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है..... बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन..... देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...