कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है.....
बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन.....
देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...
Monday, October 13, 2014
रमता जोगी
जब तक हम सयाने थे, अपने भी बेगाने थे,
जोगी जब से हो गये, हो गये ज़माने के...
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