Tuesday, October 14, 2014

आज के सिकंदर


तुम हो गये हो आसमाँ से भी ऊँचे,
क़ि दिखते नहीं ज़मीं के लोग...
हमने उस शख्स को भी देखा है
जो ख़ुद को कहता था सिकंदर,
दफ़न पड़ा है इसी मिट्टी में
ना जाने यहीं कहीं....

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