कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है.....
बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन.....
देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...
Tuesday, October 14, 2014
आज के सिकंदर
तुम हो गये हो आसमाँ से भी ऊँचे,
क़ि दिखते नहीं ज़मीं के लोग...
हमने उस शख्स को भी देखा है
जो ख़ुद को कहता था सिकंदर,
दफ़न पड़ा है इसी मिट्टी में
ना जाने यहीं कहीं....
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