Thursday, October 16, 2014

कल हो ना हो


कुछ कम मिलता है,
कुछ देर से मिलता है,
कुछ नहीं मिलता है और,
कुछ मिल के भी काम नहीं आता....

क्या मिला, क्या ना मिला,
ये क्यूँ मिला, वो क्यूँ ना मिला,
उसे क्यूँ मिला, मुझे क्यूँ ना मिला,
नहीं मिला तो क्या हुआ, मिलता तो क्या होता...

क्या सोचना, क्यूँ रोना,
इस पल का आनंद क्यूँ खोना,
एक आज मिला है खुल के जियो,
क्या पता कल हो ना हो!!!

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