कभी कई सदियाँ एक पल में सिमट जाती हैं और कभी एक पल ही सदी बन जाता है.....
बस ऐसे ही कुछ पलों की तलाश में चल पड़ा है ये फ़क़ीर मन.....
देखें कहाँ तक ले जाती है ये तलाश.......चल चला चल........फ़क़ीरा चल चला चल...
Thursday, October 16, 2014
दुखती रग़
लाले तो हैं रोटी के,
पर मन है उड़ान खटोले पर...
कुछ किया भी ना जाए
और सहा भी ना जाए.
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