चाय के उबलते प्याले को गौर से देखा है जनाब?
जीवन का हर रंग दिखेगा.
दिखेगा...
घना धुँधलका
थोड़ी सी रोशनी से मिल कर,
कैसे एक मनमोहिनी शाम सा श्यामल हो जाता है...
प्रवृति की कड़वाहट
थोड़ी सी मिठास से मिल कर,
कैसे मृत्यूंजई अनुभव बन जाती है....
ठाठें मारता उफान
थोड़ा समय देने पर,
कैसे सागर सा निर्मल हो जाता है.....
विष और अमृत
विश्वास और प्रयास की छलनी से,
कैसे अलग हो जाते हैं....
इसलिए कहता हूँ क़ि.....
चाय पीजिए जनाब
और जो मनुहार से चाय पिलाते हैं,
उनका सम्मान कीजिए जनाब !!!!
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